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श्री सूक्त विधान पूर्वक षोडशोपचार पूजा
विधि:
1.
सबसे
पहले
पूर्वाङ्गम्
करें
।
2.
इसके
बाद,
विघ्नेश्वर पूजा
करें
।
3.
उसके
पश्चात,
नीचे
दिए
गए
विस्तृत
पूजा
विधान
का
पालन
करें
।
पुनः
सङ्कल्पम्
–
(पुष्पाक्षत
लेकर
दाहिने
हाथ
में
एक
बूंद
जल
लें
और
नीचे
दिए
गए
संकल्प
का
पाठ
करें)
पूर्वोक्त
एवं
गुणविशेषण
विशिष्टायां
शुभतिथौ
श्री______मुद्दिश्य
श्री______प्रीत्यर्थं
श्रीसूक्त
विधानेन
यावच्छक्ति
ध्यानावाहनादि
षोडशोपचार
पूजां
करिष्ये
॥
(इस
प्रकार
पढ़कर
पुष्प
और
अक्षत
को
पात्र
में
रख
दें
और
हाथ
धो
लें)
ध्यानम्
–
(जिस
देवी
की
पूजा
करनी
है,
उनके
ध्यान
श्लोक
का
पाठ
करें)
ओं
श्री
______
नमः
ध्यायामि
।
(थोड़े
पुष्प
और
अक्षत
देवी
के
चरणों
में
अर्पित
कर
प्रणाम
करें)
आवाहनम्
–
हिर॑ण्यवर्णां॒
हरि॑णीं
सु॒वर्ण॑रज॒तस्र॑जाम्
।
च॒न्द्रां
हि॒रण्म॑यीं
ल॒क्ष्मीं
जात॑वेदो
म॒
आव॑ह
॥
ओं
श्री
______
नमः
आवाहयामि
।
(थोड़े
पुष्प
और
अक्षत
देवी
के
चरणों
में
अर्पित
कर
प्रणाम
करें)
आसनम्-
तां
म॒
आव॑ह॒
जात॑वेदो
ल॒क्ष्मीमन॑पगा॒मिनी᳚म्
।
यस्यां॒
हिर॑ण्यं
वि॒न्देयं॒
गामश्वं॒
पुरु॑षान॒हम्
॥
ओं
श्री
______
नमः
नवरत्नखचित
सुवर्ण
सिंहासनं
समर्पयामि
।
(देवी
को
सिंहासन
अर्पित
करने
का
भाव
करते
हुए,
थोड़े
पुष्प
और
अक्षत
देवी
के
चरणों
में
अर्पित
कर
प्रणाम
करें)
पाद्यम्-
अ॒श्व॒पू॒र्वां
र॑थम॒ध्यां
ह॒स्तिना॑दप्र॒बोधि॑नीम्
।
श्रियं॑
दे॒वीमुप॑ह्वये॒
श्रीर्मा॑दे॒वीर्जु॑षताम्
॥
ओं
श्री
______
नमः
पादयो
पाद्यं
समर्पयामि
।
(देवी
के
चरण
धोने
का
भाव
करते
हुए,
देवता
की
पंचपात्र
का
जल
उद्दरणी
से
देवी
को
दिखाकर
दूसरे
पात्र
में
छोड़
दें)
अर्घ्यम्-
कां॒
सो᳚स्मि॒तां
हिर॑ण्यप्रा॒कारा॑मा॒र्द्रां
ज्वल॑न्तीं
तृ॒प्तां
त॒र्पय॑न्तीम्
।
प॒द्मे॒
स्थि॒तां
प॒द्मव॑र्णां॒
तामि॒होप॑ह्वये॒
श्रियम्
॥
ओं
श्री
______
नमः
हस्तयोः
अर्घ्यं
समर्पयामि
।
(देवी
के
हाथ
धोने
का
भाव
करते
हुए,
देवता
की
पंचपात्र
का
जल
उद्दरणी
से
देवी
को
दिखाकर
दूसरे
पात्र
में
छोड़
दें)
आचमनीयम्-
च॒न्द्रां
प्र॑भा॒सां
य॒शसा॒
ज्वल॑न्तीं॒
श्रियं॑
लो॒के
दे॒वजु॑ष्टामुदा॒राम्
।
तां
प॒द्मिनी॑मीं॒
शर॑णम॒हं
प्रप॑द्येऽल॒क्ष्मीर्मे॑
नश्यतां॒
त्वां
वृ॑णे
॥
ओं
श्री
______
नमः
मुखे
आचमनीयं
समर्पयामि
।
(देवता
की
पंचपात्र
का
जल
उद्दरणी
से
देवी
को
दिखाकर
दूसरे
पात्र
में
छोड़
दें
और
देवी
के
मुख
धोकर
जल
पीने
का
भाव
करें)
पञ्चामृत
स्नानम्-
आप्या॑यस्व॒
समे॑तु
ते
वि॒श्वत॑स्सोम॒
वृष्णि॑यम्
।
भवा॒
वाज॑स्य
सङ्ग॒थे
॥
ओं
श्री
______
नमः
क्षीरेण
स्नपयामि
।
(गाय
के
दूध
से
अभिषेक
कर
के
तेल
या
घी
के
दीप
से
आरती
दें)
(जल
से
अभिषेक
कर
के
प्रतिमा
को
शुद्ध
करें)
द॒धि॒क्राव्णो॑अकारिषं
जि॒ष्णोरश्व॑स्य
वा॒जिन॑:
।
सु॒र॒भि
नो॒
मुखा॑
कर॒त्प्राण॒
आयूग्ं॑हि
तारिषत्
॥
ओं
श्री
______
नमः
दध्ना
स्नपयामि
।
(गाय
के
दही
से
अभिषेक
कर
के
तेल
या
घी
के
दीप
से
आरती
दें)
(जल
से
अभिषेक
कर
के
प्रतिमा
को
शुद्ध
करें)
शु॒क्रम॑सि॒
ज्योति॑रसि॒
तेजो॑सि
दे॒वोव॑स्सवि॒तोत्पु॑ना॒तु
अच्छि॑द्रेण
प॒वित्रे॑ण॒
वसो॒स्सूर्य॑स्य
र॒श्मिभि॑:
।
ओं
श्री
______
नमः
आज्येन
स्नपयामि
।
(गाय
के
घी
से
अभिषेक
कर
के
तेल
या
घी
के
दीप
से
आरती
दें)
(जल
से
अभिषेक
कर
के
प्रतिमा
को
शुद्ध
करें)
मधु॒वाता॑
ऋताय॒ते
मधु॑क्षरन्ति॒
सिन्ध॑वः
।
माध्वी᳚र्नः
स॒न्त्वौष॑धीः
।
मधु॒
नक्त॑मु॒तोष॑सि॒
मधु॑म॒त्पार्थि॑वग्ं
रज॑:
।
मधु॒द्यौर॑स्तु
नः
पि॒ता
।
मधु॑मान्नो॒
वन॒स्पति॒र्मधु॑माग्ं
अस्तु॒
सूर्य॑:
।
माध्वी॒र्गावो॑
भवन्तु
नः
।
ओं
श्री
______
नमः
मधुना
स्नपयामि
।
(शहद
से
अभिषेक
कर
के
तेल
या
घी
के
दीप
से
आरती
दें)
(जल
से
अभिषेक
कर
के
प्रतिमा
को
शुद्ध
करें)
स्वा॒दुः
प॑वस्व
दि॒व्याय॒
जन्म॑ने
।
स्वा॒दुरिन्द्रा᳚य
सु॒हवी᳚तु
नाम्ने
।
स्वा॒दुर्मि॒त्राय॒
वरु॑णाय
वा॒यवे॒
।
बृह॒स्पत॑ये॒
मधु॑मां॒
अदा᳚भ्यः
।
ओं
श्री
______
नमः
शर्करेण
स्नपयामि
।
(चीनी
से
अभिषेक
कर
के
तेल
या
घी
के
दीप
से
आरती
दें)
(जल
से
अभिषेक
कर
के
प्रतिमा
को
शुद्ध
करें)
याः
फ॒लिनी॒र्या
अ॑फ॒ला
अ॑पु॒ष्पायाश्च॑
पु॒ष्पिणी॑:
।
बृह॒स्पति॑
प्रसूता॒स्तानो॑
मुन्च॒न्त्वग्ं
ह॑सः
॥
ओं
श्री
______
नमः
फलोदकेन
स्नपयामि
।
(फलों
के
रस
से
अभिषेक
कर
के
तेल
या
घी
के
दीप
से
आरती
दें)
(जल
से
अभिषेक
कर
के
प्रतिमा
को
शुद्ध
करें)
स्नानम्
–
आ॒दि॒त्यव॑र्णे॒
तप॒सोऽधि॑जा॒तो
वन॒स्पति॒स्तव॑
वृ॒क्षोऽथ
बि॒ल्वः
।
तस्य॒
फला॑नि॒
तप॒सा
नु॑दन्तु
मा॒यान्त॑रा॒याश्च॑
बा॒ह्या
अ॑ल॒क्ष्मीः
॥
आपो॒
हिष्ठा
म॑यो॒भुव॒स्ता
न॑
ऊ॒र्जे
द॑धातन
।
म॒हेरणा॑य॒
चक्ष॑से
।
यो
व॑:
शि॒वत॑मो
रस॒स्तस्य॑
भाजयते॒
ह
न॑:
।
उ॒श॒तीरि॑व
मा॒त॑रः
।
तस्मा॒
अर॑ङ्गमामवो॒
यस्य॒
क्षया॑य॒
जिन्व॑थ
।
आपो॑
ज॒नय॑था
च
नः
।
ओं
श्री
______
नमः
शुद्धोदक
स्नानं
समर्पयामि
।
(पुष्प
से
देवी
पर
देवता
की
पंचपात्र
का
थोड़ा
जल
छिड़क
कर,
उस
पुष्प
को
देवी
के
चरणों
में
रख
दें
और
देवी
को
स्नान
कराने
का
भाव
करें)
स्नानानन्तरं
शुद्ध
आचमनीयं
समर्पयामि
।
(देवता
की
पंचपात्र
का
जल
उद्दरणी
से
देवी
को
दिखाकर
दूसरे
पात्र
में
छोड़
दें
और
देवी
के
मुख
धोकर
जल
पीने
का
भाव
करें)
वस्त्रम्
–
उपै॑तु॒
मां
दे॑वस॒खः
की॒र्तिश्च॒
मणि॑ना
स॒ह
।
प्रा॒दु॒र्भू॒तोऽस्मि॑
राष्ट्रे॒ऽस्मिन्
की॒र्तिमृ॑द्धिं
द॒दातु॑
मे
॥
ओं
श्री
______
नमः
वस्त्रयुग्मं
समर्पयामि
।
(देवी
को
वस्त्र
अर्पित
करने
का
भाव
करते
हुए,
थोड़े
पुष्प
और
अक्षत
देवी
के
चरणों
में
अर्पित
कर
प्रणाम
करें)
यज्ञोपवीतम्
–
क्षुत्पि॑पा॒साम॑लां
ज्ये॒ष्ठाम॑ल॒क्ष्मीं
ना॑शया॒म्यहम्
।
अभू॑ति॒मस॑मृद्धिं॒
च
सर्वां॒
निर्णु॑द
मे॒
गृहा॑त्
॥
ओं
श्री
______
नमः
यज्ञोपवीतं
समर्पयामि
।
(देवी
को
यज्ञोपवीत
अर्पित
करने
का
भाव
करते
हुए,
थोड़े
अक्षत
देवी
के
चरणों
में
अर्पित
कर
प्रणाम
करें)
गन्धम्
–
ग॒न्ध॒द्वा॒रां
दु॑राध॒र्षां॒
नि॒त्यपु॑ष्टां
करी॒षिणी᳚म्
।
ई॒श्वरी॑ग्ं
सर्व॑भूता॒नां॒
तामि॒होप॑ह्वये॒
श्रियम्
॥
ओं
श्री
______
नमः
दिव्य
श्री
चन्दनं
समर्पयामि
।
(गंध
को
जल
से
भिगो
कर,
एक
पुष्प
से
देवी
पर
छिड़क
कर,
उस
पुष्प
को
देवी
के
चरणों
में
रख
दें)
ओं
श्री
______
नमः
हरिद्रा
कुङ्कुम
कज्जल
कस्तूरी
गोरोचनादि
सुगन्ध
द्रव्याणि
समर्पयामि
।
(हरिद्रा,
कुंकुम,
कज्जल,
कस्तूरी
और
गोरोचन
आदि
सुगंधित
पदार्थ
देवी
को
अर्पित
करने
का
भाव
करते
हुए,
कुछ
पुष्प
और
अक्षत
देवी
के
चरणों
में
समर्पित
करें)
आभरणम्
–
मन॑स॒:
काम॒माकू॑तिं
वा॒चः
स॒त्यम॑शीमहि
।
प॒शू॒नां
रू॒पमन्न॑स्य॒
मयि॒
श्रीः
श्र॑यतां॒
यश॑:
॥
ओं
श्री
______
नमः
सर्वाभरणानि
समर्पयामि
।
(देवी
को
आभूषण
अर्पित
करने
का
भाव
करते
हुए,
थोड़े
पुष्प
और
अक्षत
देवी
को
अर्पित
करें)
पुष्पाणि
–
क॒र्दमे॑न
प्र॑जाभू॒ता॒
म॒यि॒
सम्भ॑व
क॒र्दम
।
श्रियं॑
वा॒सय॑
मे
कु॒ले
मा॒तरं॑
पद्म॒मालि॑नीम्
॥
11
॥
ओं
श्री
______
नमः
नानाविध
परिमल
पत्र
पुष्पाणि
समर्पयामि
।
(थोड़े
पुष्प
देवी
के
चरणों
में
अर्पित
कर
प्रणाम
करें)
धूपम्
–
आप॑:
सृ॒जन्तु॑
स्नि॒ग्धा॒नि॒
चि॒क्ली॒त
व॑स
मे॒
गृहे
।
नि
च॑
दे॒वीं
मा॒तरं॒
श्रियं॑
वा॒सय॑
मे
कु॒ले
॥
ओं
श्री
______
नमः
धूपं
समर्पयामि
।
(घंटानाद
करते
हुए
देवी
को
जलाई
हुई
अगरबत्ती
दिखाएं)
दीपम्-
आ॒र्द्रां
पु॒ष्करि॑णीं
पु॒ष्टिं॒
पि॒ङ्ग॒लां
प॑द्ममा॒लिनीम्
।
च॒न्द्रां
हि॒रण्म॑यीं
ल॒क्ष्मीं
जात॑वेदो
म॒
आव॑ह
॥
ओं
श्री
______
नमः
दीपं
समर्पयामि
।
(घंटानाद
करते
हुए
देवी
को
जलाया
हुआ
दीपक
दिखाएं)
नैवेद्यम्
–
आ॒र्द्रां
य॒:
करि॑णीं
य॒ष्टिं॒
सु॒व॒र्णां
हे॑ममा॒लिनीम्
।
सू॒र्यां
हि॒रण्म॑यीं
ल॒क्ष्मीं॒
जात॑वेदो
म॒
आवह
॥
ओं
श्री
______
नमः
नैवेद्यं
समर्पयामि
।
(घंटानाद
करते
हुए,
नीचे
का
मंत्र
बोलते
हुए
पुष्प
से
जल
को
नैवेद्य
के
चारों
ओर
3
बार
दक्षिणावर्त
दिशा
में
छिड़कें)
ओं
भूर्भुव॑स्सुव॑:
।
तत्स॑वितु॒र्वरे᳚ण्य॒म्
।
भ॒र्गो॑
दे॒वस्य॑
धी॒महि
।
धियो॒
योन॑:
प्रचो॒दया᳚त्
॥
सत्यं
त्वा
ऋतेन
परिषिञ्चामि
(पुष्प
से
नैवेद्य
पर
जल
छिड़कें)
(सायंकाले)
–
ऋतं
त्वा
सत्येन
परिषिञ्चामि
(पुष्प
से
नैवेद्य
पर
जल
छिड़कें)
अमृतमस्तु
।
अ॒मृ॒तो॒प॒स्तर॑णमसि
।
(उस
पुष्प
को
देवी
के
चरणों
में
रख
दें)
ओं
प्रा॒णाय॒
स्वाहा᳚
।
(देवी
को
नैवेद्य
दिखाएं)
ओं
अ॒पा॒नाय॒
स्वाहा᳚
।
(देवी
को
नैवेद्य
दिखाएं)
ओं
व्या॒नाय॒
स्वाहा᳚
।
(देवी
को
नैवेद्य
दिखाएं)
ओं
उ॒दा॒नाय॒
स्वाहा᳚
।
(देवी
को
नैवेद्य
दिखाएं)
ओं
स॒मा॒नाय॒
स्वाहा᳚
।
(देवी
को
नैवेद्य
दिखाएं)
(नीचे
के
मंत्र
बोलते
हुए
पुष्प
से
जल
को
देवी
के
ऊपर
5
बार
छिड़कें)
मध्ये
मध्ये
पानीयं
समर्पयामि
।
अ॒मृ॒ता॒पि॒धा॒नम॑सि
।
उत्तरापोशनं
समर्पयामि
।
हस्तौ
प्रक्षालयामि
।
पादौ
प्रक्षालयामि
।
शुद्धाचमनीयं
समर्पयामि
।
ताम्बूलम्
–
तां
म॒
आव॑ह॒
जात॑वेदो
ल॒क्ष्मीमन॑पगा॒मिनी᳚म्
।
यस्यां॒
हि॑रण्यं॒
प्रभू॑तं॒
गावो॑
दा॒स्योऽश्वा᳚न्वि॒न्देयं॒
पुरु॑षान॒हम्
॥
ओं
श्री
______
नमः
ताम्बूलं
समर्पयामि
।
(देवी
को
ताम्बूल
अर्पित
करने
का
भाव
करते
हुए,
थोड़े
पुष्प
और
अक्षत
देवी
के
चरणों
में
अर्पित
कर
प्रणाम
करें)
नीराजनम्
–
यः
शुचि॒:
प्रय॑तो
भू॒त्वा
जु॒हुया᳚दाज्य॒
मन्व॑हम्
।
श्रिय॑:
प॒ञ्चद॑शर्चं॒
च
श्री॒काम॑:
सत॒तं
ज॑पेत्
॥
ओं
श्री
______
नमः
कर्पूर
नीराजनं
समर्पयामि
।
नीराजनानन्तरं
शुद्धाचमनीयं
समर्पयामि
।
नमस्करोमि
।
(घंटानाद
करते
हुए
देवी
को
कपूर
की
आरती
दें)
मन्त्रपुष्पम्
–
ओं
श्री
______
नमः
सुवर्ण
दिव्य
मन्त्रपुष्पं
समर्पयामि
।
(थोड़े
पुष्प
और
अक्षत
देवी
के
चरणों
में
अर्पित
कर
प्रणाम
करें)
आत्मप्रदक्षिण
नमस्कारान्
–
यानिकानि
च
पापानि
जन्मान्तरकृतानि
च
तानि
तानि
प्रणश्यन्ति
प्रदक्षिण
पदे
पदे
।
पापोऽहं
पापकर्माऽहं
पापात्मा
पापसम्भव
।
त्राहिमां
कृपया
देवी
शरणागतवत्सले
।
अन्यथा
शरणं
नास्ति
त्वमेव
शरणं
मम
।
तस्मात्कारुण्य
भावेन
रक्ष
रक्ष
सुरेश्वरी
।
ओं
श्री
______
नमः
आत्मप्रदक्षिण
नमस्कारान्
समर्पयामि
।
(अक्षत
और
पुष्प
लेकर,
आत्म
प्रदक्षिणा
तीन
बार
करें
और
फिर
उन्हें
देवी
के
चरणों
में
रख
दें)
साष्टाङ्ग
नमस्कारम्
–
उरसा
शिरसा
दृष्ट्या
मनसा
वचसा
तथा
।
पद्भ्यां
कराभ्यां
कर्णाभ्यां
प्रणामोष्टाङ्गमुच्यते
॥
ओं
श्री
______
नमः
साष्टाङ्ग
नमस्कारां
समर्पयामि
।
(पुरुष
साष्टाङ्गं,
महिला
पञ्चाङ्गं
नमस्कारं
कुर्युः)
सर्वोपचाराः
–
ओं
श्री
______
नमः
छत्रं
आच्छादयामि
।
ओं
श्री
______
नमः
चामरैर्वीजयामि
।
ओं
श्री
______
नमः
नृत्यं
दर्शयामि
।
ओं
श्री
______
नमः
गीतं
श्रावयामि
।
ओं
श्री
______
नमः
आन्दोलिकान्नारोहयामि
।
ओं
श्री
______
नमः
अश्वानारोहयामि
।
ओं
श्री
______
नमः
गजानारोहयामि
।
समस्त
राज्ञीयोपचारान्
देव्योपचारान्
समर्पयामि
।
क्षमा
प्रार्थना
–
अपराध
सहस्राणि
क्रियन्तेऽहर्निशं
मया
।
दासोऽयमिति
मां
मत्वा
क्षमस्व
परमेश्वरी
।
आवाहनं
न
जानामि
न
जानामि
विसर्जनम्
।
पूजाविधिं
न
जानामि
क्षमस्व
परमेश्वरी
।
मन्त्रहीनं
क्रियाहीनं
भक्तिहीनं
महेश्वरी
।
यत्पूजितं
मया
देवी
परिपूर्णं
तदस्तु
ते
।
(पुष्पाक्षत,
एक
बूंद
जल
दाहिने
हाथ
में
लेकर
ऊपर
का
श्लोक
पढ़कर,
देवी
के
चरणों
में
रख
दें)
अनया
श्रीसूक्त
विधान
पूर्वक
ध्यान
आवाहनादि
षोडशोपचार
पूजया
भगवती
सर्वात्मिका
श्री
______
सुप्रीता
सुप्रसन्ना
वरदा
भवन्तु
॥
(थोड़े
पुष्प
और
अक्षत
देवी
के
चरणों
में
अर्पित
कर
प्रणाम
करें)
तीर्थप्रसाद
ग्रहणम्
–
अकालमृत्यहरणं
सर्वव्याधिनिवारणम्
॥
समस्तपापक्षयकरं
श्री
______
पादोदकं
पावनं
शुभम्
॥
(दाहिने
हाथ
में
जल
लेकर,
ऊपर
का
श्लोक
पढ़कर
तीन
बार
तीर्थ
पीएं)
श्री
______
नमः
प्रसादं
शीरसा
गृह्णामि
।
(देवी
के
चरणों
से
एक
पुष्प
लेकर
उसे
अपनी
दोनों
आँखों
से
स्पर्श
कराएं)
ओं
शान्तिः
शान्तिः
शान्तिः
।