हैंदवम्
हैं
హై
हैंदवम्
ஹி
હિં
English
हिंदी
മലയാളം
తెలుగు
தமிழ்
ಕನ್ನಡ
📍
𖦏
Auto Detect Location
Font Size:
a
a
a
कालभैरवाष्टकम्
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं
व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं
कृपाकरम्
।
नारदादियोगिबृन्दवन्दितं
दिगम्बरं
काशिकापुराधिनाथ
कालभैरवं
भजे
॥
1
॥
भानुकोटिभास्वरं
भवाब्धितारकं
परं
नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं
त्रिलोचनम्
।
कालकालमम्बुजाक्षमक्षशूलमक्षरं
काशिकापुराधिनाथ
कालभैरवं
भजे
॥
2
॥
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं
श्यामकायमादिदेवमक्षरं
निरामयम्
।
भीमविक्रमं
प्रभुं
विचित्रताण्डवप्रियं
काशिकापुराधिनाथ
कालभैरवं
भजे
॥
3
॥
भुक्तिमुक्तिदायकं
प्रशस्तचारुविग्रहं
भक्तवत्सलं
स्थिरं
समस्तलोकविग्रहम्
।
निक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं
काशिकापुराधिनाथ
कालभैरवं
भजे
॥
4
॥
धर्मसेतुपालकं
त्वधर्ममार्गनाशकं
कर्मपाशमोचकं
सुशर्मदायकं
विभुम्
।
स्वर्णवर्णकेशपाशशोभिताङ्गनिर्मलं
काशिकापुराधिनाथ
कालभैरवं
भजे
॥
5
॥
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं
नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं
निरञ्जनम्
।
मृत्युदर्पनाशनं
करालदंष्ट्रभूषणं
काशिकापुराधिनाथ
कालभैरवं
भजे
॥
6
॥
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं
दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्
।
अष्टसिद्धिदायकं
कपालमालिकाधरं
काशिकापुराधिनाथ
कालभैरवं
भजे
॥
7
॥
भूतसङ्घनायकं
विशालकीर्तिदायकं
काशिवासिलोकपुण्यपापशोधकं
विभुम्
।
नीतिमार्गकोविदं
पुरातनं
जगत्पतिं
काशिकापुराधिनाथ
कालभैरवं
भजे
॥
8
॥
कालभैरवाष्टकं
पठन्ति
ये
मनोहरं
ज्ञानमुक्तिसाधकं
विचित्रपुण्यवर्धनम्
।
शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं
ते
प्रयान्ति
कालभैरवाङ्घ्रिसन्निधिं
ध्रुवम्
॥
9
॥
इति
श्रीमच्छङ्कराचार्य
विरचितं
कालभैरवाष्टकं
सम्पूर्णम्
।
Recite with devotion and pure heart
Regular practice brings spiritual benefits