Haindavam Logo - Lord Ganesha

हैंदवम्

📍
Font Size:

सङ्कट मोचन हनुमान् अष्टकम्

बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अन्धियारोम् ताहि सों त्रास भयो जग को, यह सङ्कट काहु सों जात टारो देवन आनि करी बिनती तब, छाडवोयी दियो रवि कष्ट निवारो को नहीं जानत है जग में कपि, सङ्कटमोचन नाम तिहारो 1 बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पन्थ निहारो चौङ्कि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो 2 अङ्गद के सङ्ग लेन गे सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहावो पगु धारो हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो 3 रावण त्रास दी सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो 4 बान लग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्राण उबारो 5 रावण जुध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह सङ्कट भारो आनि खगेस तबै हनुमान जु, बन्धन काटि सुत्रास निवारो 6 बन्धू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि , देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो 7 काज किये बडवो देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो कौन सो सङ्कट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु सङ्कट होए हमारो 8 दोहा लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लङ्गूर वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर

Recite with devotion and pure heart

Regular practice brings spiritual benefits