Haindavam Logo - Lord Ganesha
Haindavam
📍
Font Size:

श्री नृसिंह सरस्वती अष्टकं

इन्दुकोटितेज करुणसिन्धु भक्तवत्सलं नन्दनात्रिसूनु दत्तमिन्दिराक्ष श्रीगुरुम् । गन्धमाल्य अक्षतादि बृन्ददेववन्दितं वन्दयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 1 ॥ मोहपाश अन्धकार छाय दूर भास्करं आयताक्ष पाहि श्रियावल्लभेश नायकम् । सेव्यभक्तबृन्दवरद भूयो भूयो नमाम्यहं वन्दयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 2 ॥ चित्तजादिवर्गषट्कमत्तवारणाङ्कुशं तत्त्वसारशोभितात्म दत्त श्रियावल्लभम् । उत्तमावतार भूतकर्तृ भक्तवत्सलं वन्दयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 3 ॥ व्योम वायु तेज आप भूमि कर्तृमीश्वरं कामक्रोधमोहरहित सोमसूर्यलोचनम् । कामितार्थदातृ भक्तकामधेनु श्रीगुरुं वन्दयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 4 ॥ पुण्डरीक आयताक्ष कुण्डलेन्दुतेजसं चण्डदुरितखण्डनार्थ दण्डधारि श्रीगुरुम् । मण्डलीकमौलि मार्ताण्ड भासिताननं वन्दयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 5 ॥ वेदशास्त्रस्तुत्यपाद आदिमूर्ति श्रीगुरुं नादबिन्दुकलातीत कल्पपादसेव्ययम् । सेव्यभक्तबृन्दवरद भूयो भूयो नमाम्यहं वन्दयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 6 ॥ अष्टयोगतत्त्वनिष्ठ तुष्टज्ञानवारिधिं कृष्णवेणितीरवास पञ्चनदीसङ्गमम् । कष्टदैन्यदूरि भक्ततुष्टकाम्यदायकं वन्दयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 7 ॥ नारसिंहसरस्वती नाम अष्टमौक्तिकं हार कृत्य शारदेन गङ्गाधर आत्मजम् । धारणीक देवदीक्ष गुरुमूर्ति तोषितं परमात्मानन्द श्रिया पुत्रपौत्रदायकम् ॥ 8 ॥ नारसिंहसरस्वतीय अष्टकं च यः पठेत् घोर संसार सिन्धु तारणाख्य साधनम् । सारज्ञान दीर्घ आयुरारोग्यादि सम्पदां चारुवर्गकाम्यलाभ नित्यमेव यः पठेत् ॥ 9 ॥ इति श्रीगुरुचरितामृते श्रीनृसिंहसरस्वत्युपाख्याने सिद्धनामधारक संवादे श्रीनृसिंहसरस्वती अष्टकम् ॥

Recite with devotion and pure heart

Regular practice brings spiritual benefits