हैंदवम्
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दकारादि दुर्गा अष्टोत्तर शत नामावलि
ओं
दुर्गायै
नमः
ओं
दुर्गति
हरायै
नमः
ओं
दुर्गाचल
निवासिन्यै
नमः
ओं
दुर्गामार्गानु
सञ्चारायै
नमः
ओं
दुर्गामार्गानिवासिन्यै
न
नमः
ओं
दुर्गमार्गप्रविष्टायै
नमः
ओं
दुर्गमार्गप्रवेसिन्यै
नमः
ओं
दुर्गमार्गकृतावासायै
ओं
दुर्गमार्गजयप्रियायै
ओं
दुर्गमार्गगृहीतार्चायै
॥
10
॥
ओं
दुर्गमार्गस्थितात्मिकायै
नमः
ओं
दुर्गमार्गस्तुतिपरायै
ओं
दुर्गमार्गस्मृतिपरायै
ओं
दुर्गमार्गसदास्थाप्यै
ओं
दुर्गमार्गरतिप्रियायै
ओं
दुर्गमार्गस्थलस्थानायै
नमः
ओं
दुर्गमार्गविलासिन्यै
ओं
दुर्गमार्दत्यक्तास्त्रायै
ओं
दुर्गमार्गप्रवर्तिन्यै
नमः
ओं
दुर्गासुरनिहन्त्र्यै
नमः
॥
20
॥
ओं
दुर्गासुरनिषूदिन्यै
नमः
ओं
दुर्गासुर
हरायै
नमः
ओं
दूत्यै
नमः
ओं
दुर्गासुरवधोन्मत्तायै
नमः
ओं
दुर्गासुरवधोत्सुकायै
नमः
ओं
दुर्गासुरवधोत्साहायै
नमः
ओं
दुर्गासुरवधोद्यतायै
नमः
ओं
दुर्गासुरवधप्रेष्यसे
नमः
ओं
दुर्गासुरमुखान्तकृते
नमः
ओं
दुर्गासुरध्वंसतोषायै
॥
30
॥
ओं
दुर्गदानवदारिन्यै
नमः
ओं
दुर्गाविद्रावण
कर्त्यै
नमः
ओं
दुर्गाविद्राविन्यै
नमः
ओं
दुर्गाविक्षोभन
कर्त्यै
नमः
ओं
दुर्गशीर्षनिक्रुन्तिन्यै
नमः
ओं
दुर्गविध्वंसन
कर्त्यै
नमः
ओं
दुर्गदैत्यनिकृन्तिन्यै
नमः
ओं
दुर्गदैत्यप्राणहरायै
नमः
ओं
दुर्गधैत्यान्तकारिन्यै
नमः
ओं
दुर्गदैत्यहरत्रात्यै
नमः
॥
40
॥
ओं
दुर्गदैत्याशृगुन्मदायै
ओं
दुर्ग
दैत्याशनकर्यै
नमः
ओं
दुर्ग
चर्माम्बरावृतायै
नमः
ओं
दुर्गयुद्धविशारदायै
नमः
ओं
दुर्गयुद्दोत्सवकर्त्यै
नमः
ओं
दुर्गयुद्दासवरतायै
नमः
ओं
दुर्गयुद्दविमर्दिन्यै
नमः
ओं
दुर्गयुद्दाट्टहासिन्यै
नमः
ओं
दुर्गयुद्धहास्यार
तायै
नमः
ओं
दुर्गयुद्धमहामात्ताये
नमः
॥
50
॥
ओं
दुर्गयुद्दोत्सवोत्सहायै
नमः
ओं
दुर्गदेशनिषेन्यै
नमः
ओं
दुर्गदेशवासरतायै
नमः
ओं
दुर्ग
देशविलासिन्यै
नमः
ओं
दुर्गदेशार्चनरतायै
नमः
ओं
दुर्गदेशजनप्रियायै
नमः
ओं
दुर्गमस्थानसंस्थानायै
नमः
ओं
दुर्गमथ्यानुसाधनायै
नमः
ओं
दुर्गमायै
नमः
ओं
दुर्गासदायै
नमः
॥
60
॥
ओं
दुःखहन्त्र्यै
नमः
ओं
दुःखहीनायै
नमः
ओं
दीनबन्धवे
नमः
ओं
दीनमात्रे
नमः
ओं
दीनसेव्यायै
नमः
ओं
दीनसिद्धायै
नमः
ओं
दीनसाध्यायै
नमः
ओं
दीनवत्सलायै
नमः
ओं
देवकन्यायै
नमः
ओं
देवमान्यायै
नमः
॥
70
॥
ओं
देवसिद्दायै
नमः
ओं
देवपूज्यायै
नमः
ओं
देववन्दितायै
नमः
ओं
देव्यै
नमः
ओं
देवधन्यायै
नमः
ओं
देवरम्यायै
नमः
ओं
देवकामायै
नमः
ओं
देवदेवप्रियायै
नमः
ओं
देवदानववन्दितायै
नमः
ओं
देवदेवविलासिन्यै
नमः
॥
80
॥
ओं
देवादेवार्चन
प्रियायै
नमः
ओं
देवदेवसुखप्रधायै
नमः
ओं
देवदेवगतात्मि
कायै
नमः
ओं
देवतातनवे
नमः
ओं
दयासिन्धवे
नमः
ओं
दयाम्बुधायै
नमः
ओं
दयासागरायै
नमः
ओं
दयायै
नमः
ओं
दयालवे
नमः
ओं
दयाशीलायै
नमः
॥
90
॥
ओं
दयार्ध्रहृदयायै
नमः
ओं
देवमात्रे
नमः
ओं
धीर्घाङ्गायै
नमः
ओं
दुर्गायै
नमः
ओं
दारुणायै
नमः
ओं
दीर्गचक्षुषॆ
नमः
ओं
दीर्गलोचनायै
नमः
ओं
दीर्गनेत्रायै
नमः
ओं
दीर्गबाहवे
नमः
ओं
दयासागरमध्यस्तायै
नमः
॥
100
॥
ओं
दयाश्रयायै
नमः
ओं
दयाम्भुनिघायै
नमः
ओं
दाशरधी
प्रियायै
नमः
ओं
दशभुजायै
नमः
ओं
दिगम्बरविलासिन्यै
नमः
ओं
दुर्गमायै
नमः
ओं
देवसमायुक्तायै
नमः
ओं
दुरितापहरिन्यै
नमः
॥
108
॥
इति
श्री
दकारदि
दुर्गा
अष्टोत्तर
शतनामावलिः
सम्पूर्णं
Recite with devotion and pure heart
Regular practice brings spiritual benefits